आज दिल कि बात
आज मैं तुमसे बिछड़ना नहीं चाहती | और तुम कहते हो शायद यही तक़दीर है | मैं कहूँ भी तो क्या कहूँ , तुम्हारे लफ्ज़ मुझे बेबस कर देते है | तुम्हारे आगे मुझे कुछ दिखता नहीं | यही एक वजह है जिससे मैं बेबस हूँ | लगता जैसे सब कुछ थम सा गया हो | लेकिन ये वो वक्त नहीं जब पहली बार मैंने तुम्हे देखा था | तब सारी दुनिया, हर लमहा थम सा गया था | जैसे कोई डोर उस दिल से इस दिल तक चली आ रही थी | कोई चिंगारी मेरे अंतरात्मा भी जाएगी थी | लेकिन आज वो पल नहीं है | क्यों की तुम मेरे पास नहीं हो | कहते हो प्यार नहीं है | क्या तुम यह कह कर खुश हो ??? - काजल